Vidyapati Song – Gaura tor Angana | Maithili Lyrics

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Gaura tor Angana


मित्रगण,

सुखद आनंद भ’ रहल अछि जे महाकवि विद्यापति रचित “गौरा तोर अंगना” गीत अपने लोकनिक समक्ष  प्रस्तुत क’ रहल छी | मिथिलाक घर घर में शिव पूजित छथि | कवि त्रिभुवन नाथ कैलाशवासी शिव क’ कतेक साधारण रुपे देखा रहल छथि जखन की शिव त्रिभुवनक दानी छथि | गीत मे कवि क’ भक्ति शिव लग परिलक्षित होयछ | गीतक सफलता श्रोता लोकनिक संग अछि | अपने सभ क’ गीत नीक लागे ताही मे हमर सफलता | गीतक संग मिथिलाक सभ्यता संस्कृतिक संक्षिप्त परिचय सेहो वीडियो में देल गेल अछि | जों अपने लोकनि क’ गीत नीक लागे त’ अधिक सं अधिक संख्या मे शेयर करू जाहि सं हमरा प्रोत्साहन भेट’ |

जय मिथिला-जय मैथिली

रजनी पल्लवी

गौरा तोर अँगना

गौरा तोर अँगना, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल, बड अजगुत देखल तोर अँगना
गौरा तोर अँगना, बड अजगुत देखल तोर अँगना
गौरा तोर अँगना
एक दिश बाघ सिँह करे हुलना, एक दिश बाघ सिँह
एक दिश बाघ सिँह करे हुलना, एक दिश बाघ सिँह करे हुलना
दोसर बरद छ ह सेहो बौ ना, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल तोर अँगना, गौरा तोर अँगना
कार्तिक गणपति दुई चेगँना, कार्तिक गणपति
कार्तिक गणपति दुई चेगँना, कार्तिक गणपति दुई चेगँना
एक चढे मोर, एक मुस लदना, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल तोर अँगना, गौरा तोर अँगना
पैच उधार माँगे गेलौ अँगना, पैच उधार माँगे
पैच उधार माँगे गेलौ अँगना, पैच उधार माँगे गेलौ अँगना
सम्पति देखल एक भँग घोटना, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल तोर अँगना, गौरा तोर अँगना
खेती नै पथारी करे भाँग अपँना, खेती नै पथारी करे
खेती नै पथारी करे भाँग अपँना, खेती नै पथारी करे भाँग अपँना
जगतक दानी थिका तिन भुवना, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल तोर अँगना, गौरा तोर अँगना
भनहि विधापति सुनु उगना, भनहि विधापति
भनहि विधापति सुनु उगना, भनहि विधापति सुनु उगना
दरिद्र हरण करु धएल शरणा, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल, बड अजगुत देखल तोर अँगना, गौरा तोर अँगना
बड अजगुत देखल तोर अँगना, बड अजगुत देखल तोर अँगना
बड अजगुत देखल तोर अँगना

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